Friday, April 26, 2013

आज मन रोएको छ कही कतै चिसो पसेको छ खोइ !!!

आज मन रोएको छ कही कतै चिसो पसेको छ खोइ !!!
म   झुक्किदैं  छु  कि कोही  थगिदै छ  म भुल्दै छु कि
कोही    अल्मलिदै   छ    अहं     ठम्याउन    सकिएन
आज मन   दुखेको   छ  चिरा चिरा   फाटेको  छ  खोइ!!

म हराउदै छु कि  कोही टाढिदै छ  म अलगिदै छु कि
कोही     रिसाउदै    छ     अहं   छुट्याउन     सकिएन
आज मन साचैं सुन्य छ  मन आज बोल्ने धुनमा छैन
किनकी   लाग्दै   छ    आज   म   सगं   कोही खेल्दै छ  
जित्ने     चाहनामा      आँफै       सँग       हार्दै      छ

सुनिल बज्राचार्य 
काठमाडौँ  

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